144 sal bad ka MAHAKUMBH PRAYAGRAJ ME
कुछ लोगों ने महाकुंभ में सड़कें बंद और जाम देखे।
कुछ लोगों ने महाकुंभ में अध्यात्म और दिव्यता देखी।
कुछ लोगों ने महाकुंभ में अपने माता-पिता और अपने सपने पूरे होते देखे।
लेकिन किसी ने भी ये नहीं देखा कि कैसे इतने छोटे से शहर मे लगभग आधे भारत के लोगो के लिए बिजली, पानी, रहने, खाने आदि की सफल व्यवस्था की ।
लेकिन किसी ने भी ये नहीं देखा कि 43.57 करोड़ हिन्दुओं में से किसी ने भी किसी के भोजन या चाय में थूक नहीं डाला।
लेकिन किसी ने भी ये नहीं देखा कि 43.57 करोड़ हिन्दुओं में से किसी ने भी किसी अन्य धर्म के अस्तित्व को चुनौती नहीं दी, न ही किसी के नरसंहार का आह्वान किया।
लेकिन किसी ने भी ये नहीं देखा कि 43.57 करोड़ हिन्दुओं में से किसी ने भी सड़कों, ट्रेनों या रेलवे स्टेशनों पर पूजा नहीं की, जिससे दूसरों को परेशानी होती।
लेकिन किसी ने भी ये नहीं देखा कि महाकुंभ में कोई अलग घाट दलितों, ब्राह्मणों, जाटों या अग्रवालों के लिए नहीं था। सभी हिन्दुओं ने साथ में स्नान किया। हर हिन्दू को जातिवाद के बिना समान रूप से सम्मानित किया गया।
लेकिन किसी ने भी ये नहीं देखा कि 43.57 करोड़ हिन्दुओं में से कोई भी भूखा नहीं सोया ।
लेकिन किसी ने भी ये नहीं देखा कि इतने सारे हिन्दुओं के बावजूद, किसी ने भी अन्य धर्मों की धार्मिक संरचनाओं पर पत्थरबाजी नहीं की, न ही अजान या सामूहिक प्रार्थना के दौरान व्यवधान डाला।
लेकिन किसी ने भी ये नहीं देखा कि 43.57 करोड़ हिन्दुओं में से किसी ने भी विदेशी को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित नहीं किया।
Dinag ki batti jalane wala sach jo ham kaiee bar ham jan hi nahi pate hai n ??
🙏!!
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