Ahmiyat SONE KI Ahmiyat RISHATO KI
एक छोटे से गाँव में एक नामी सुनार का परिवार रहता था। सुनार की गिनती बड़े ईमानदार और हुनरमंद लोगों में होती थी। लेकिन किस्मत ने ऐसा पलटा खाया कि उसकी आकस्मिक मृत्यु हो गई। परिवार की आर्थिक हालत बिगड़ने लगी और हालात इतने खराब हो गए कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम भी मुश्किल हो गया।
एक दिन सुनार की पत्नी ने अपने बेटे को पास बुलाया। हाथ में नीलम का एक चमचमाता हार थमाते हुए बोली,
"बेटा, इसे अपने चाचा की दुकान पर ले जाओ और कहना इसे बेचकर कुछ पैसे दे दें। शायद इससे हमारा गुजारा हो जाए।"
लड़का हार लेकर चाचा की दुकान पर पहुँचा। चाचा ने हार को बड़े ध्यान से देखा, पलटा, तौला, और फिर मुस्कुराते हुए बोले,
"बेटा, माँ से कहना कि अभी बाज़ार मंदा है। थोड़ा रुककर बेचेंगे तो अच्छे दाम मिलेंगे। फ़िलहाल ये लो थोड़े पैसे, और कल से मेरी दुकान पर आकर बैठना।"
लड़के को यह बात अजीब तो लगी, लेकिन उसने बिना कुछ कहे पैसे लिए और घर लौट गया।
अगले दिन से लड़का चाचा की दुकान पर जाने लगा। वहाँ उसने गहनों और हीरों की परख करना सीखा। धीरे-धीरे वह इतना माहिर हो गया कि लोग दूर-दूर से अपने हीरे-जवाहरात की जाँच कराने आने लगे। लड़के का आत्मविश्वास बढ़ता गया और चाचा को उस पर गर्व होने लगा।
एक दिन चाचा ने मुस्कुराते हुए कहा,
"बेटा, अब माँ से वो नीलम का हार लेकर आओ। बाजार में अब तेजी है, इसके अच्छे दाम मिलेंगे।"
लड़का उत्साहित होकर घर गया। माँ से हार लेकर जब उसने उसे खुद परखा तो वह हैरान रह गया। हार नकली था! वह कुछ देर तक सोचता रहा, फिर चुपचाप हार घर पर ही छोड़ दिया और दुकान लौट आया।
चाचा ने लड़के को देखते ही पूछा,
"बेटा, हार नहीं लाए?"
लड़का थोड़ा सकुचाते हुए बोला,
"चाचा, वो तो नकली था।"
चाचा ने हँसते हुए उसके कंधे पर हाथ रखा और बोले,
"यही तो मैं चाहता था कि तुम्हें खुद इसका पता चले। जब तुम पहली बार हार लेकर आए थे, अगर मैंने उसी वक्त कह दिया होता कि हार नकली है, तो शायद तुम्हें लगता कि आज जब हमारे हालात खराब हैं, तो चाचा भी धोखा दे रहे हैं। लेकिन अब जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया, तो सच अपने आप सामने आ गया।"
चाचा ने गहरी सांस लेते हुए कहा,- "बेटा, यही इस दुनिया की सच्चाई है। ज्ञान के बिना हम अक्सर गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं और रिश्ते टूट जाते हैं। लेकिन जब इंसान खुद सच्चाई को समझ लेता है, तब उसे सब साफ नजर आता है।"
लड़का चुपचाप खड़ा सोच रहा था कि कैसे आज उसने सिर्फ हार की नहीं, बल्कि जिंदगी के असली गहने यानी ज्ञान और रिश्तों की अहमियत को भी परख लिया था।
II
Jaishree Kaushik
"Mom's Interesting Body Management Motivation Programmer"
curewithjaishree.in
curewithjaishree@gmail.com
🙏!!
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