♥️ Story-♥️
SAKARATMK SOCH KI SHAKTI
SE
LABH MILTA HAI PAKKA
_*कहानी पढ़ने से पहले एक ठहराव(Pause) लें... और ठहराव की शक्ति को महसूस करें...*_
*सकारात्मक सोच की शक्ति*
एक व्यक्ति बहुत दिनों से चिंता में चल रहा था जिसके कारण वह काफी चिड़चिड़ा हो गया था और तनाव में रहने लगा था। वह इस बात से परेशान था कि घर के सारे खर्चे उसे ही उठाने पड़ते हैं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसी के ऊपर है और किसी ना किसी रिश्तेदार का उसके यहाँ आना जाना लगा ही रहता है। इन्ही बातों को सोच सोच कर वह काफी परेशान रहता था तथा बच्चों को अक्सर डांट देता था और अपनी पत्नी से भी ज्यादातर उसका किसी न किसी बात पर झगड़ा चलता रहता था।
एक दिन उसका बेटा उसके पास आया और बोला," पिताजी मेरा स्कूल का होमवर्क करा दीजिये।" वह व्यक्ति पहले से ही तनाव में था तो उसने बेटे को डांट कर भगा दिया लेकिन जब थोड़ी देर बाद उसका गुस्सा शांत हुआ तो वह बेटे के पास गया। उसने देखा कि बेटा सोया हुआ है और उसके हाथ में उसके होमवर्क की कॉपी है। उसने कॉपी लेकर जैसे ही उसे नीचे रखनी चाही, उसकी नजर होमवर्क के शीर्षक पर पड़ी। होमवर्क का शीर्षक था…
“वे चीजें जो हमें शुरू में अच्छी नहीं लगतीं वे बाद में अच्छी लगने लगती हैं।” इस शीर्षक पर बच्चे को एक पैराग्राफ लिखना था जो उसने लिख लिया था।
उत्सुकतावश उसने बच्चे का लिखा पढना शुरू किया। बच्चे ने लिखा था…
● मैं अपने वार्षिक परीक्षा को बहुत धन्यवाद् देता हूँ क्योंकि शुरू में तो यह बिलकुल अच्छी नहीं लगती लेकिन इनके बाद स्कूल की छुट्टियाँ हो जाती हैं।
● मैं ख़राब और कड़वी स्वाद वाली दवाइयों को बहुत धन्यवाद् देता हूँ क्योंकि शुरू में तो यह कड़वी लगती हैं लेकिन ये मुझे बीमारी से ठीक करती हैं।
● मैं सुबह – सुबह जगाने वाली उस अलार्म घड़ी को बहुत धन्यवाद् देता हूँ जो मुझे हर सुबह बताती है कि मैं जीवित हूँ।
● मैं ईश्वर को भी बहुत धन्यवाद देता हूँ जिसने मुझे इतने अच्छे पिता दिए क्योंकि उनकी डांट मुझे शुरू में तो बहुत बुरी लगती है लेकिन वे मेरे लिए खिलौने लाते हैं, मुझे घुमाने ले जाते हैं और मुझे अच्छी-अच्छी चीजें खिलाते हैं। और मुझे इस बात की ख़ुशी है कि मेरे पास पिता हैं क्योंकि मेरे दोस्त सोहन के तो पिता ही नहीं हैं।
बच्चे का होमवर्क पढते पढ़ते पिता की आँखे नम होने लगी। पढ़ने के बाद वह व्यक्ति जैसे अचानक नींद से जाग गया! उसकी सोच बदल गयी! बच्चे की लिखी बातें उसके दिमाग में बार बार घूम रही थी, खासकर वह अंतिम पंक्ति! उसकी नींद उड़ गयी। फिर वह व्यक्ति थोडा शांत होकर बैठा और उसने अपनी परेशानियों के बारे में सोचना शुरू किया।
●● मुझे पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, इसका मतलब है कि मेरे पास मेरा परिवार है, बीवी बच्चे हैं और ईश्वर की कृपा से मैं उन लोगों से ज्यादा खुशनसीब हूँ जिनके पास परिवार नहीं हैं और वे दुनिया में बिल्कुल अकेले हैं।
●● मेरे यहाँ कोई ना कोई मित्र या रिश्तेदार आता जाता रहता है, इसका मतलब है कि मेरी एक सामाजिक हैसियत है और मेरे पास मेरे सुख दुःख में साथ देने वाले लोग हैं।
●●हे ! मेरे भगवान् ! तेरा बहुत-बहुत शुक्रिया ••• मुझे माफ़ करना, मैं तेरी कृपा को पहचान नहीं पाया।
इसके बाद उसकी सोच एकदम से बदल गयी, उसकी सारी परेशानी, सारी चिंता एक दम से जैसे ख़त्म हो गयी। वह एकदम से बदल सा गया। वह भागकर अपने बेटे के पास गया और सोते हुए बेटे को गोद में उठाकर उसके माथे को चूमने लगा और अपने बेटे को तथा ईश्वर को धन्यवाद देने लगा
हमारे सामने जो भी परेशानियाँ हैं, हम जब तक उनको नकारात्मक नज़रिये से देखते रहेंगे, तब तक हम परेशानियों से घिरे रहेंगे लेकिन जैसे ही हम उन्हीं चीजों को, उन्ही परिस्तिथियों को, एक पल ठहरकर, सकारात्मक नज़रिये से देखेंगे तो हमारी सोच बदलने लग जायेग
*"स्वीकार करने की कला ही जीवन है। और जब हम जो कुछ भी सामने आता है उसे स्वीकार करना सीख लेते हैं, चाहे यह कोई परिस्थिति हो, बिजनेस परिणाम हो या जीवन साथी हो, तो यह स्वीकार्यता ही इसे सफल बनाती है। जब बैक्टीरिया भी प्रतिकूल परिस्थितियों में जीवित रहने के लिए रूपांतरित हो जाता है तो हम क्यों नहीं?"*
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SWASTH AAP KE HATH ME HAI
SAFALTA AAP KE HATH ME HAI
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Jaishree kaushik
(curewithjaishree.in)
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